• 14 Jun, 2024

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धर्मयुद्ध 2024

धर्मयुद्ध 2024

2024 के चुनाव राजनीति और राजनैतिक दलों से कहीं आगे जाएंगे। इस बार दांव बहुत ऊँचे हैं। इस विषय में हमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए—यदि श्री नरेंद्र मोदी की सरकार स्पष्ट बहुमत के साथ वापस नहीं आती हैं, हम भारत के लिए यह युद्ध I.N.D.I.A और वैश्विक वोक (Woke) वादिओं से हार सकते हैं।

सनातन धर्म का विनाश?

"जब सनातन धर्म क्षीण होता है तब राष्ट्र भी क्षीण होता है। और यदि सनातन धर्म का विनाश कभी संभव हो तो इस राष्ट्र का भी उस सनातन धर्म के संग ही समापन हो जाएगा।" श्री अरविंद

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वेद, एक बिम्ब

वेद महासागर हैं। सूक्ष्म व सघन ज्ञान के।  और यह ज्ञान का सागर पूरी मानवजाति की विरासत है।

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वैदिक प्रतीक

वैदिक प्रतीक साहित्य में विशिष्ट स्थान रखते हैं। ये कल्पना या केवल काव्यात्मक आभूषण नहीं। वरन ये आध्यात्मिक सत्य के विभिन्न रूपों का इंगन हैं।

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वेद समझने के दस सूत्र

ऋग्वेद कदाचित् मानवजाति का प्राचीनतम साहित्य हैं। समस्त भारत दर्शन, विश्व के धर्म व साहित्य उनसे अत्यंत प्रभावित हुए हैं किंतु उनका मूल अर्थ हम भारतीय ही भूल गए। यह आधारभूत अर्थ है उनका आध्यात्मिक ज्ञान व अनुभव, उनका मांत्रिक काव्य। इसी गहन बोध को आधुनिक काल में स्वामी दयानंद व उनके पश्चात श्री अरविंद ने पुनः उजागर किया। यहाँ हम उनके विवेचन व भाष्य से प्रेरित अनुवाद व विश्लेषण प्रकाशित कर रहे हैं।

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'आरोविल' - सच होता हुआ एक ख़ूबसूरत स्वप्न 

हर जगह पहुँचना भी संभव नहीं, परंतु ज्ञान बढ़ाने और अच्छी जानकारी प्राप्त करने के बहुत से साधन हैं। अच्छा हो कि दूसरों को जानने से पहले अपने परिवार को जानें। और सारा भारत ही हमारा परिवार ह...

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ऋग्वेद प्रथम मण्डल सूक्त तीन का अनुवाद व विवेचन

ऋग्वेद कदाचित् मानवजाति का प्राचीनतम साहित्य हैं। समस्त भारत दर्शन, विश्व के धर्म व साहित्य उनसे अत्यंत प्रभावित हुए हैं किंतु उनका मूल अर्थ हम भारतीय ही भूल गए। यह आधारभूत अर्थ है उनका आध्यात्मिक ज्ञान व अनुभव, उनका मांत्रिक काव्य। इसी गहन बोध को आधुनिक काल में स्वामी दयानंद व उनके पश्चात श्री अरविंद ने पुनः उजागर किया। यहाँ हम उनके विवेचन व भाष्य से प्रेरित अनुवाद व विश्लेषण प्रकाशित कर रहे हैं।

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ऋग्वेद अनुवाद मण्डल १ सूक्त २

ऋग्वेद कदाचित् मानवजाति का प्राचीनतम साहित्य हैं। समस्त भारत दर्शन, विश्व के धर्म व साहित्य उनसे अत्यंत प्रभावित हुए हैं किंतु उनका मूल अर्थ हम भारतीय ही भूल गए। यह आधारभूत अर्थ है उनका आध्यात्मिक ज्ञान व अनुभव, उनका मांत्रिक काव्य। इसी गहन बोध को आधुनिक काल में स्वामी दयानंद व उनके पश्चात श्री अरविंद ने पुनः उजागर किया। यहाँ हम उनके विवेचन व भाष्य से प्रेरित अनुवाद व विश्लेषण प्रकाशित कर रहे हैं।

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